History of Computer कंप्यूटर का इतिहास क्या है

कंप्यूटर का इतिहास क्या है आज के समय में हम सभी लोग कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के बारे में तो जानते हैं history of computer in hindi language.  कंप्यूटर का उपयोग भी कर रहे हैं. लेकिन यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि कंप्यूटर का इतिहास क्या है. इसका कब शुरुआत हुआ. किस तरह से इसको धीरे-धीरे विकसित करके एक कंप्यूटर का पूर्ण रूप से आकार दिया गया.

पहले के जमाने में जब किसी प्रकार के कोई छोटा मैथमेटिकल गणितीय जोड़ घटाना गुणा भाग या किसी प्रकार का भी कैलकुलेशन लोग तो कर लेते होंगे.

लेकिन बड़े-बड़े कैलकुलेशन के लिए जो उस समय उपयोग किया जाने वाला पहला जो मशीन या टेक्नोलॉजी का आविष्कार हुआ उसको एक केलकुलेटर के नाम से जाना जाता है और उसका किस तरह से उपयोग किया जाता था और कैसे कैसे उसको और भी बेहतर बनाया गया इन सभी के बारे में हम लोग इस लेख में पूरी जानकारी पाने वाले हैं.

History of Computer in hindi

Computer का पूरा रूपरेखा या बनावट जो है वह गणित से है गणितीय गणना के अनुसार और उसी के कार्य प्रणाली के ऊपर कंप्यूटर का पूरी तरह से निर्माण हुआ है भारत के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने जीरो का खोज किया था कंप्यूटर का जब शुरुआत हुआ उस समय भी कंप्यूटर जो समझता था उसका भी रूप 01 के रूप में है.

कंप्यूटर पूर्ण रूप से बायनरी नंबर को ही समझता है और दुनिया में जब सबसे पहले किसी भी प्रकार के कंप्यूटर या कोई टेक्नोलॉजी नहीं था उस समय सबसे पहले एक केलकुलेटर का आविष्कार किया गया जिससे केवल बहुत ही छोटे अंको का यूज किया जाता था.

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एबकस

 दुनिया का सबसे पहला जो केलकुलेटर का रूप दिया गया उसका नाम abacus था जिससे केवल गणित के छोटी संख्याओं का गुणा किया जा सकता था इस केलकुलेटर का खोज चीन के द्वारा लगभग 5000 वर्ष पहले किया गया था उस समय इसको बनाने के लिए सरिया यानी क्षण का जो छोटे-छोटे टुकड़े मोती के समान होते थे.

उसका इस्तेमाल करके और इसको बनाया गया था और उसके फिसलने के हिसाब से उसका कैलकुलेशन किया जाता था लेकिन इसके द्वारा गुणा भाग नहीं किया जा सकता था लेकिन सर्वप्रथम कंप्यूटर के जो शुरुआती एक रूप था उसका शुरुआत इसी छोटे से केलकुलेटर के साथ हुआ.

Nepir’s bones

सबसे पहले abacus केलकुलेटर बनने के बाद जो कंप्यूटर या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दूसरा जो केलकुलेटर का विस्तार किया गया उस कैलकुलेटर का नाम नेपियर बोंस पड़ा जिस का आविष्कार सर जॉन नेपियर ने वर्ष 1617 में किया था.

कैलकुलेटर से जोड़ घटाव गुणा भाग आ बहुत ही आसानी से कैलकुलेट किया जाता था इस कैलकुलेटर मशीन को बनाने के लिए भी झाड़ का जो आयताकार छोटे-छोटे जो टुकड़े होते थे उसको इस्तेमाल करके इसे एक आयताकार रूप में बनाया गया था जिसके द्वारा गणितीय कैलकुलेशन को किया जा रहा था.

सर जॉन नेपियर एक फॉनस्क्किों के गणितज्ञ थे जो नेपियर बोंस केलकुलेटर के आविष्कार के लिए प्रसिद्ध हुए थे वो एक जाने-माने गणितज्ञ एवं गणित के विशेषज्ञ थे जो तरह-तरह के अविष्कार के लिए जाने जाते थे.

और उन्होंने बहुत कम समय में इस नेपियर बोंस केलकुलेटर का आविष्कार किया था जिससे कंप्यूटर या केलकुलेटर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक दूसरा नई क्रांति के रूप में नेपियर बोंस कैलकुलेटर आया था.

Pascal or Pascaline 

कंप्यूटर के इतिहास में पासकल और पास्क्रीलन का तीसरा खोज था पासकल का आविष्कार ब्लेज पास्कल ने सन 1642 में किया था जो एक मशीन के आकार के रूप में बंद करके तैयार हुआ था.

जिसमें चलने के लिए कुछ पहियों का भी इस्तेमाल करके उसका आयताकार रूप बनाया गया था या जो मशीन था यह बहुत ही तेज गति से किसी भी प्रकार के गणितीय गणना को करता था.

यह पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर के नाम से भी जाना गया जिसका इस्तेमाल बहुत ही तेजी के साथ होने लगा और यह मशीन बहुत ही तेज और फास्ट रूप से किसी भी प्रकार के गणितीय कैलकुलेशन जैसे कार्यों को करने लगा जिस में जोड़ने घटाने भाग देने गुणा करने की विशेष रूप से क्षमता था.

ब्लेज पास्कल एक आधुनिक वैज्ञानिकों में से माने जाते हैं जो एक फ्रांसीसी गणितज्ञ थे और उन्होंने 19 वर्ष की उम्र में ही एक मशीन विकसित की थी जो संख्याओं को जोड़ने और घटाने में पूरी तरह से सक्षम था.

इस तरह की मशीन बनाने के कारण उस समय लोगों को इसका उपयोग करने से बहुत ही समय और श्रम का भी बचत होता था और कंप्यूटर के क्षेत्र में यह तीसरी नई क्रांति थी.

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Stepped Recknor or Leibnitz wheel

कंप्यूटर के क्षेत्र में चौथी नई क्रांति के रूप में जर्मन के गणितज्ञ फिलॉस्फर Gottfried Wilhelm Leibnitz नेबर्स 1673 में पास्कल का जो इन्वेंशन आविष्कार था उसको और भी विकसित किया.

और उस मशीन को और भी बेहतर तरीके से उसको अविष्कार किया जिससे एक डिजिटल मैकेनिकल कैलकुलेटर के रूप में तैयार किया गया और उस मशीन को और भी ज्यादा बेहतर बना करके और लोगों के बीच में लाया गया जिससे एक डिजिटल केलकुलेटर के रूप में उपयोग किया जाने लगा.

Difference engine

इंग्लैंड के वैज्ञानिक एवं गणितज्ञ चार्ल्स बेबेज नेम सन 1822 में एक डिफरेंस इंजन नाम के मशीन का अविष्कार किया जो की बहुत ही आसानी से तरह-तरह के कैलकुलेशन को करने में बहुत ही अच्छा काम करता था.

सन 1833 में जब इस डिफेंस engine नाम के मशीन का आविष्कार किया गया था उस समय इस मशीन से किसी प्रकार के कुछ छोटे-मोटे डॉक्यूमेंट को आसानी से किसी पेपर पर छापने के लिए भी उपयोग किया जाता था और यह मशीन एक प्रिंटेबल मशीन के साथ-साथ कैलकुलेशन मशीन के रूप में भी काम करता था.

Analytical engine 1833

डिफरेंस इंजन को बनाने के बाद फिर से चार्ल्स बेबेज के द्वारा एक आर्टिकल इंजन को विकसित किया गया और उस मशीन से कंप्यूटर के आकार के रूप में तैयार किया गया जिससे गणितीय जो समस्या होता था उसको ठीक करने में या उसका कैलकुलेशन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता था और इस मशीन में 500 मेटल कार्ड्स का भी इस्तेमाल किया गया था.

जो एक एस्टीम पावर्ड मशीन के रूप में काम करता था वैसे अभी एक मशीन केलकुलेटर मशीन के रूप में ही काम करता था जो 6 डिजिट के अंको को कैलकुलेट करने और भी मैथमेटिकल गणितीय कैलकुलेशन को थोड़ा एडवांस रूप में कैलकुलेट करने के लिए उपयोगी मशीन था.

एनालिटिकल इंजन को तैयार करने में चार्ल्स बैबेज के साथ-साथ ऑर्डर अगस्ता जो दुनिया के पहले प्रोग्रामर थे वह भी इस मशीन को बनाने में काम किए थे और प्रोग्रामिंग का जो रूपरेखा था.

उन्होंने इस मशीन में काम करके एक कंप्यूटर के आकार के रूप में यह कैलकुलेटर मशीन को तैयार किया था इसके बाद कंप्यूटर का जो अविष्कार था वह शुरू हो गया और एक कंप्यूटर के आकार के रूप में कंप्यूटर का अलग-अलग जेनरेशन के रूप में अविष्कार हुआ.

चार्ल्स बेबेज को फादर ऑफ कंप्यूटर कहा जाता है क्योंकि सबसे पहले कंप्यूटर का आकार के रूप में कैलकुलेटिंग मशीन के साथ-साथ उसमें प्रोग्रामिंग का भी उपयोग करके मशीन का रूप रेखा तैयार किया गया जिसको वर्ष 1833 में बनाया गया इसलिए कंप्यूटर के जनक चार्ल्स बेबेज कहे जाते हैं.

पहले जनरेशन का कंप्यूटर

वर्ष 1930 से 1950 के बीच पहले जनरेशन कंप्यूटर के रूप में वेक्कम tubes का इस्तेमाल किया गया जो कंप्यूटर के पहले रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला पहला मशीन था इस मशीन का रूप देने के लिए glass tubes का इस्तेमाल किया गया था जिनके भीतर circuit का भी उपयोग किया गया था.

 दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर

ट्रांजिस्टर कंप्यूटर के रूप में तैयार हुआ जिसका इस्तेमाल भी दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर के रूप में किया गया इस कंप्यूटर को पहले जनरेशन के कंप्यूटर के तुलना में थोड़ा मॉडर्नाइजेशन करके और इसके बनावट और इसके इस्तेमाल करने के तौर-तरीके कार्यप्रणाली को थोड़ा और भी बेहतर करके और इस कंप्यूटर का आविष्कार किया गया.

तीसरे जनरेशन के कंप्यूटर  

इंटीग्रेटेड क्रिकेट के रूप में तीसरे जनरेशन के Computer का आविष्कार हुआ और इस Computer का भी रूप और आकार सेकंड जनरेशन के कंप्यूटर के तुलना में थोड़ा छोटा और इसको कम खर्चीला और बेहतर रूप से इसको तैयार किया गया जो कि सेकंड जनरेशन कंप्यूटर के बाद इस कंप्यूटर का उपयोग किया जाने लगा.

कंप्यूटर के चौथे जनरेशन या पीढ़ी 1971 to 1985  

Computer के चौथे जनरेशन या पीढ़ी का आविष्कार के बाद वर्ष 1971 से माइक्रो प्रोसेसर कंप्यूटर का उपयोग किया जाने लगा. अन्‍य पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में चौथे जनरेशन के माइक्रोप्रोसेसर Computer का जो रूपरेखा और बनावट था वो तीसरे जनरेशन के कंप्यूटरों की तुलना में बिल्कुल अलग था.

इस कंप्यूटर को एक प्रोफेशनल Computer के रूप में ही तैयार किया गया जिसमें सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट मॉनिटर कीबोर्ड माउस सबको एक प्रोफेशनल तरीके से डिजाइन करके इस कंप्यूटर को तैयार किया गया इस Computer को एक विशाल एकीकृत सर्किट यानी की लाज इन ग्रीटेड क्रिकेट Computer कहा जाता है.

कंप्यूटर केे पांचवी पीढ़ी 1985

वर्ष 1985 के बाद Computer के पांचवी पीढ़ी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस Computer के रूप में शुरुआत हुआ इस पांचवी पीढ़ी के Computer के आने के बाद Computer का दुनिया में एक बहुत ही बड़ा नई क्रांति और नए रूप में दुनिया का कामकाज का तौर तरीका शुरू हुआ.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर का उपयोग उच्च तकनीक रिसर्च एवं अन्य प्रकार के बड़े-बड़े कामों के लिए एवं अनेक प्रकार के रिसर्च से संबंधित एवं वैज्ञानिकों के लिए एक वरदान के रूप में इस Computer का उपयोग किया जाने लगा.

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सारांश  

इस लेख में हमने कंप्यूटर के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास किया है जिसमें कब से एक कंप्यूटर का शुरुआत हुआ और सबसे पहले किस तरह का एक मशीन या कैलकुलेटर का आकार या उसका ढांचा तैयार किया गया.

और धीरे-धीरे उसको किस तरह से और भी बेहतर बना करके एक अच्छे कैलकुलेटर मशीन और फिर Computer के आकार के रूप में उसको तैयार किया गया.

इस लेख में हमने  कंप्‍यमटर का इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देने का प्रयास किया है यदि किसी भी प्रकार के और भी कोई आपके मन में सवाल आ रहा है तो कृपया कमेंट करके जरूर पूछें. यह जानकारी कैसा लगा कृपया कमेंट जरुर करें और अपने दोस्त मित्रों के साथ शेयर भी करें.

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