आज का जीवन शीर्षक परेशानियॉंं एव उपाय

Aaj ka jivan – आज का जीवन गांव और शहर दोनों जगहों के रहन-सहन तौर-तरीकों में क्या अंतर है। Aaj ka jivan में शहर और गांव की जिंदगी कैसी है, इसी विषय पर इस लेख में प्रकाश डाला गया है। इस लेख का मुख्य उद्देश्‍य Aaj ka jivan पर प्रकाश डालना है।

Aaj ka jivan में लोग अपने आप से ही परेशान हैं। आज लोगों के पास समय नहीं है कि अपने घर में किसी सदस्य से बैठकर उनका हाल-चाल लें या उनसे थोड़ा बहुत बातें करें। क्योंकि आज का जीवन टेक्नोलॉजी इंटरनेट स्मार्टफोन के जैसा ही हो गया है। जितना तेज गति से इंटरनेट स्मार्टफोन चलता है उतना ही तेज गति से आज का जीवन चल रहा है।

Aaj ka jivan में हम और आप अपने आप में गुम हैं। इसका सबसे बड़ा कारण स्मार्ट फोन और इंटरनेट हैं। क्योंकि इंटरनेट और स्मार्टफोन आपको किसी दूसरे से बात करने ही नहीं देता है। किसी दूसरे से मिलने जुलने का सबसे बड़ा बाधक यह स्मार्टफोन और इंटरनेट है। Aaj ka jivan में सोशल मीडिया हम लोगों के जीवन पर ज्यादा हावी हो गया है, जिसके कारण दिन रात सोने से पहले और जागने के बाद स्मार्टफोन ही स्मार्टफोन दिखाई देता है। जीवन एक यात्रा

वर्तमान जीवन एक नजर Aaj ka jivan

पूरे दिन जब तक हम लोग जगे रहते हैं। मोबाइल में बैठकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, टि्वटर, व्हाट्सएप, टेलीग्राम के अलावा जितने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उस पर लगे हुए रहते हैं। घर में क्या हो रहा है घर के सदस्य कैसे हैं, उनसे बात करने का समय नहीं है।

Aaj ka jivan में माता-पिता से बात करने के लिए समय नहीं है। क्योंकि हर एक व्यक्ति स्मार्टफोन से इतना जुड़ गया है, कि अब उसको किसी भी दूसरे व्यक्ति की आवश्यकता महसूस नहीं होता है।

पहले का जीवन ऐसा होता था जहां परिवार के सभी सदस्य बैठकर एक साथ बातें करते थे। उस समय लोग अपने सुख-दुख एक दूसरे के साथ साझा करते थे। लंबी लंबी बैठकें होती थी जिसमें आस-पड़ोस के लोग भी आते थे, मिलजुलकर हंसी-खुशी अपना दुख सुख बांटते थे।

लेकिन वह दिन अब बीत गया है। अब दिन कैसा है बस स्वयं में खुश रहो। स्मार्टफोन के साथ लगे रहो, न किसी से बोलना, न किसी से बात करना, न कहीं आना, न कहीं जाना, बस बैठकर टीवी और स्मार्टफोन में गुम हो जाना यही आज का जीवन है। जीवन में क्‍या करें

Aaj ka jivan

Aaj ka jivan शीर्षक

Aaj ka jivan में लोग अपने दुख सुख को अपने पास ही समेटे के रहते हैं जिसके कारण लोगों में तनाव बढ़ रहा है। जितना लोग पहले खुश हुआ करते थे आज उतना लोग सुखी और खुश नहीं है। क्योंकि जब तक आप लोगों के बीच खुलकर बात नहीं करेंगे तब तक आपके जीवन आपके विचार आपके अंदर खुशी का भाव प्रकट जागृत नहीं होगा।

कहा जाता है कि मनुष्य कभी भी समाज में रहकर ही खुशी महसूस कर सकता है। एक अशांत मन को खुशी तब मिलती है जब उसके परिवार के सभी सदस्य उसके साथ मिलकर उसके सुख दुख को बांटते हैं।

आज के समय में समाज में चाहे गांव हो या शहर हो अधिकतर जगहों पर देखा जाता है कि लोग इकट्ठे होकर बातें नहीं करते हैं। वैसे शहरों में तो बिल्कुल ही इसका चलन खत्म हो गया है। गांव देहात में अभी भी कुछ लोग हैं जो आपस में मिलजुल कर बात करते हैं।

लेकिन धीरे-धीरे गांव में भी यह जो पुरानी सभ्यता है इसका अब समाप्ति हो रहा है। क्योंकि गांव में भी अब स्मार्टफोन और इंटरनेट टीवी का उपयोग बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है। जिसके कारण लोग अब अपने घर से बाहर निकल कर दूसरों के पास बैठना और उससे बातें करना उचित नहीं समझते हैं।

शहरों में आज का जीवन

पैसा नौकरी रोजगार के लिए हम लोग शहर में जाते हैं। लेकिन शहरों का जीवन कैसा है शहर का जीवन सुबह उठो बाथरूम में जाओ ब्रश करो स्नान करो नाश्ता करने का भी समय नहीं है।

भागते भागते नाश्ता करो और टिफिन पैक करके और रास्ते में दौड़ते हुए बस पकड़ो या मेट्रो से या जो भी साधन है उससे ऑफिस पहुंचना हैं। ऑफिस में पूरे दिन काम करना हैं। आज के समय में ऑफिस में भी टाइमिंग फिक्स नहीं है। 

आप का टाइमिंग 6:00 बजे तक का है तो भी आपको एक्स्ट्रा वहां पर एक 2 घंटे काम करने पड़ते हैं। कभी-कभी तो ऑफिस से निकलने में रात के 10:00 भी बज जाते हैं। फिर घर आना खाना और सो जाना सुबह जगना फिर उसी काम में लग जाना यही आज की शहर की जिंदगी है। 

लोगों के पास अपनों से एक बात करने का भी समय नहीं है कि गांव में रह रहे हमारे माता-पिता भाई-बहन पड़ोसी से समाचार भी कर लिया जाए। उनका जीवन काम काम भागदौड़ यही जिंदगी है। 

जीवन में जितना ज्यादा महत्व पैसों का है उतना ही ज्यादा महत्व परिवार का भी है। इन पैसों का महत्व तब तक ही समझ में आता है जब तक आप जवान हैं। जब आपका शरीर बूढ़ा हो जाएगा उस समय आप कितना अकेला महसूस करेंगे यह अनुभव कर सकते हैं।

शहरों में किसी के पास समय नहीं है कि आपसे दो बातें करें और हम इस जिंदगी में इतनी भागदौड़ के आदी हो गए हैं, कि आज हम रिश्ते नाते को भूलते जा रहे हैं। 

आज लोगों के पास समय नहीं है कि अपने रिश्तेदारों से बात करें इस लेख का लिखने का सबसे बड़ा कारण यही है कि हम लोग अपने रिश्तेदार अपने गांव अपने मिट्टी अपने परिवार से जो दूर होते जा रहे हैं।

उस दूरियों को मिटा कर फिर से उसी जिंदगी की तरफ लौट चलें। जहां रिश्तेदार परिवार पड़ोसी गांव मिट्टी से हम लोग जुड़े हुए रहते थे। वही जिंदगी हमारे जीवन में हर समय सुख खुशी से भरी हुई हो सकती है।

इसीलिए पैसा के साथ-साथ अपने गांव अपने परिवार अपने पड़ोसी अपने रिश्तेदार से भी निरंतर संवाद करते रहें। जीवन में संवाद का बहुत बड़ा महत्व है और इस संवाद को कभी भी बंद नहीं करना चाहिए।

इंटरनेट स्मार्टफोन या टीवी आप एक दिन देखते देखते इससे उब जाएंगे और आपको इससे बहुत ज्यादा नफरत होगा। क्योंकि इसका असर आपकी मानसिक स्थिति को बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

सारांश

आज के जिंदगी के बारे में यही छोटी सी जानकारी आप लोग के साथ साझा करना था, तो ऐसे ही जानकारियों से भरा और प्रेरक कहानी के साथ-साथ और भी टेक्नोलॉजी के बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए इस वेबसाइट को आप लोग निरंतर विजिट करते रहें धन्यवाद।

ravi
नमस्कार रवि शंकर तिवारी ज्ञानीटेक रविजी ब्लॉग वेबसाईट के Founder हैं। वह एक Professional blogger भी हैंं। जो कंप्‍यूटर ,टेक्‍नोलॉजी, इन्‍टरनेट ,ब्‍लॉगिेग, SEO, एमएस Word, MS Excel, Make Money एवं अन्‍य तकनीकी जानकारी के बारे में विशेष रूचि रखते हैंं। इस विषय से जुड़े किसी प्रकार का सवाल हो तो कृपया जरूर पूछे। क्‍योकि इस ब्‍लॉग का मकसद लोगो बेहतर जानकारी उपलब्‍ध कराना हैंं।

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